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  • यहां की गतिविधियां बहुत अच्छी लगीं।सपरिवार यहां आकर बहुत अच्छा लगा।यहां का वातावरण, वैदिक धर्म के प्रचार प्रसार का कार्य सराहनीय है।मै व्यक्तिगत रूप से न्यास के कार्यकारी अध्यक्ष अशोक आर्य जी को धन्यवाद देना चाहता हूं।जयन्ती लाल  एम पटेल मुम्बैइ पश्चिम
  • प्रथम बार महर्षि दयानन्द सरस्वती के जीवन दर्शन और कर्म को व्याख्यायित करती प्रदर्शनी देखकर हार्दिक प्रसन्नता हुई।इसे देखने,पढ्ने,और समझने हेतु कम से कम तीन दिन की आवश्यकता है।धैर्य व शान्ति से देखें व ह्रिदयंगम करें तो निश्चित ही आर्यसमज के विचार दर्शन को समझ सकते हैं।वाकैइ यह वह पवित्र स्थान है,जिसे मैने श्रद्धा से नमन किया,जहां महर्षि दयानन्द ने समाधि लगाकर सत्यार्थ प्रकाश को लिखा।विषपायी,456,अभिनन्दन,मन्दसौर्।
  • ॠषि दयानन्द की इस पवित्र कर्मभूमि सत्यार्थ प्रकाश रचना स्थल (नवलखा महल) में आकर अत्यन्त प्रसन्नता हुई।विशेष रूप से श्री अशोक आर्य जी से चर्चा कर आत्मीयता तथा प्रेम का अनुभव हुआ।यहां जिस प्रकार सत्यार्थ प्रकाश के महोत्सवों द्वारा जिस प्रकार वैदिक विचारों को विश्व में प्रचारित किया जा रहा है वह अत्यन्त सराहनीय एव प्रेरणास्पद है जिससे हमें भी अपने कार्य के विस्तार की प्रेरणा मिली है।वेद्व्रत,श्रुति विज्ञान आचार्यकुलम्,सोनिपत

 

 

 

 

 

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